उत्तरकाशी हेलीकॉप्टर क्रैश: आज देहरादून लाए जांएगे दोनों पायलटों के शव, दी जाएगी श्रद्धांजलि

देहरादून देहरादून लाए जाएंगे पायलटों के शव - फोटो उत्तरकाशी जिले के आपदा प्रभावित आराकोट क्षेत्र के गांवों में राहत सामग्री पहुंचाने के दौरान हुए हेलीकॉप्टर क्रैश हादसे में मृतक पायलट और को-पायलट More »

 

ताइवान में चमके शूलिनी के सितारे

बी यंग स्टार्टअप बूटकैंप में छाए विश्वविद्यालय के तीन छात्र

नौणी – शूलिनी विश्वविद्यालय के छात्रों ने ताइवान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पुरस्कार जीता हैं। ताइवान से विश्वविद्यालय को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए 21 से 28 जुलाई तक एक सप्ताह तक चलने वाले दूसरे बी यंग स्टार्टअप बूटकैंप का प्रस्ताव आया था। बूटकैंप का उद्देश्य विचारों को एक स्टार्टअप में बदलना था। छात्रों को अपने विचारों पर दो मिनट का वीडियो बनाना था। इसके लिए दस छात्रों को शॉर्टलिस्ट किया गया। इनमें शूलिनी विश्वविद्यालय से वंशिका और निशि संजय काका, जो पहले बैच के बीटेक बायोटेक एसआरपी से हैं और चिराग जुनेजा, जो बीटेक फूडटेक से हैं, को इस बूटकैंप में भाग लेने का मौका मिला। वंशिका ने एक बायो फफूंदनाशी बनाने का विचार दिया, जो फंगस स्क्लेरोटिनिया स्क्लेरोटोरियम को पूरी तरह से खत्म कर सकता है। यह उनकी शोध परियोजना थी, जिस पर वह डा. सौरभ कुलश्रेष्ठ के साथ पिछले दो वर्षों से काम कर रही थीं। चिराग का विचार एक ऐप का था, जो क्षेत्रीय रसोई से संबंधित था। निशि ने एक जैव ईंधन का विचार दिया। इस प्रतियोगिता कुल 60 छात्र शामिल हुए, जो थाईलैंड, फिलीपींस, इंडोनेशिया और यूएसए जैसे देशों से आए थे। वंशिका और चिराग टीम लीडर बने और निशि एक टीम का हिस्सा थी, जिसका नेतृत्त्व ताइवानी छात्र कर रहे थे। छात्रों को अपने उत्पाद के आसपास एक व्यावसायिक प्रस्ताव तैयार करने के लिए 15 टीमों में विभाजित किया गया था।  सभी 15 टीमों में केवल चार टीमों को पुरस्कार मिला। तीन टीमों ने एक उत्कृष्ट पुरस्कार जीता और एक को प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला। वंशिका की टीम में एक फिलिपींस और दो ताइवानी शामिल थे और उन्हें आइडिया के लिए उत्कृष्ट पुरस्कार मिला। चिराग की टीम में दो ताइवानी और थाईलैंड का एक छात्र शामिल था और उनकी टीम को उत्कृष्टता पुरस्कार भी मिला। तीनों छात्रों ने कहा कि वे वाइस चांसलर प्रो. अतुल खोसला, अंतराराष्ट्रीय कार्यालय स्टाफ विशेष रूप से डा. रोजी धंटा और डा. सौरभ कुलश्रेष्ठ के आभारी हैं।

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