New Era of Services in Himachal Pradesh

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प्रेमी जोड़ों की अश्लीलता का अड्डा बन गया है श्मशान घाट

प्रेमी जोड़ों की अश्लीलता का अड्डा बन गया है श्मशान घाट

 

जोगिंद्रनगर: भारतीय समाज में आए खुलेपन और मोबाइल संस्कृति के चलते आज मंदिर, पार्क यहां तक कि श्मशानघाट भी मनचले युवक-युवतियों का गढ़ बनते जा रहे हैं। आलम यह है कि इन स्थानों पर सुबह से ही युवक-युवतियों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है और यह सिलसिला उस समय तक जारी रहता है, जब तक कॉलेज या स्कूलों में छुट्टी नहीं हो जाती। आस्था के नाम पर मंदिर व गुरुद्वारा आदि स्थानों पर न तो इन बच्चों को जाने से कोई रोक पाता और न ही कोई टोक सकता है। मंदिर परिसर में इन लड़के-लड़कियों को जोड़ों की शक्ल में बैठे देख कई लोगों ने तो दोपहर के समय मंदिर जाना तक छोड़ दिया है। यदि भूलवश इनको कोई पूछ भी ले कि सारा दिन यहां बैठकर यहां क्या करते हैं तो उन्हें इसके बदले अपशब्दों का सामना करना पड़ता है।
मजबूरन हटाने पड़े बैंच
जोगिंद्रनगर सनातन धर्म सभा ने अपने परिसर में मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के बैठने की बहुत उत्तम व्यवस्था करते हुए स्टील के बैंच लगवाए थे ताकि श्रद्धालु यहां आराम कर सकें, मगर इन बैंचों पर सुबह से शाम तक युवक-युवतियों के जमावड़े से खिन्न होकर मंदिर कमेटी को ये बैंच उठाने पर मजबूर होना पड़ा। सनातम धर्म सभा व श्मशानघाट जोगिंद्रनगर के प्रधान जुगल किशोर गुप्ता ने बताया कि सनातम धर्म सभा पिछले काफी समय से बच्चों की इन हरकतों से परेशान थी और मजबूरन सभा को मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए रखे गए बैंचों को उठाना पड़ा और जब से बैंच उठाए गए हैं, तब से इन बच्चों की संख्या में कमी आई है। मंदिर कमेटी ने इन बच्चों से तंग आकर अब परिसर में कैमरे लगाने का निर्णय लिया है। इसके बाद श्मशानघाट परिसर के पार्क में तो हालात बहुत ही बदतर हैं। यहां सुबह से ही इन जोड़ों का तांता लग जाता है और इनको आपत्तिजनक हालत में देख कर हर किसी को शर्म आ जाती है, मगर इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
गाली-गलौच करते हैं
ऐसे ही हालात यहां के गीता भवन के हैं, जहां सुबह से ही नशेड़ी लोगों का तांता लग जाता है। इस भव्य परिसर के मालिक ओम मरवाह ने कहा कि यह सुंदर भवन पानी की कूहल के किनारे और एकांत में होने के कारण असामाजिक तत्वों का ठिकाना बनता जा रहा है और जब इन लोगों को वहां से भगाते हैं तो वे गाली-गलौच करते हुए वहां से चले जाते हैं। दूसरे तीसरे दिन फिर से वे परिसर के आगे-पीछे दिख जाते हैं।मंदिर प्रधान ने पुलिस से भी आग्रह किया है कि शहर के धार्मिक सहित अन्य स्थानों में दिन में 3-4 बार पैट्रोलिंग की जाए, ताकि धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनी रहे।

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